Top cryptocurrency Exchange list in India,
Which is the Best Crypto Exchange - Explained in Hindi
क्रिप्टो
एक्सचेंज क्या होता है ? कितने प्रकार के होते हैं ? क्या क्रिप्टो एक्सचेंज सेफ हैं
? बेस्ट क्रिप्टो एक्सचेंज को कैसे पहचानें ? ऐसे कुछ सवालों के बारे में जानकारी प्राप्त
करेंगे। जो लोग क्रिप्टो के बारे में जानना चाहते हैं जो क्रिप्टो लवर हैं उनको कभी
न कभी क्रिप्टो एक्सचेंज के बारे में भी जानना पड़ेगा और कोई न कोई क्रिप्टो एक्सचेंज
का उपयोग करना पड़ेगा। इस लिए आइए जानते हैं
की क्रिप्टो एक्सचेंज क्या है, क्यों जरूरी है , ना हो तो क्या फर्क पड़ेगा।
क्रिप्टो
एक्सचेंज को आसानी से समझने के लिए एक उदाहरण देखते हैं।
आप कोई दुकान
से कोई चीज खरीदते हैं और पेमेंट करते हैं। यदि आप यह पेमेंट केश में करते हैं तो केश
रुपये को रेगुलर करंसी या फ़िएट करंसी कहा जाता है।
यह पेमेंट
गूगल पे , फोन पे या पेटीएम के जरिए - मोबाइल से कोड को स्कैन करके भी किया जा सकता
है। आपने लोगों को ऐसा करते भी देखा होगा। तो ये पेमेंट डिजिटल करंसी से हुआ ऐसा कहा
जाता है। दोनों ही मामलों में आपके बैंक एकाउन्ट से दुकानदार के बैंक एकाउन्ट में रुपयों
का ट्रांसेक्शन यानि लेनदेन होता है। बीच में भारतीय रिजर्व बैंक होती है जिसका सिस्टम
यह चेक करता है कि आपके बैंक खाते में पेमेंट करने के लिए पैसा है या नहीं और उसके
बाद ही पेमेन्ट किया जाता है। यह पूरी प्रोसेस कुछ ही सेकंड में हो जाती है।
उसी तरह जब
एक क्रिप्टो वॉलेट से दूसरे के क्रिप्टो वॉलेट में पेमेन्ट होता है तो बीच में कोई
बैंक नहीं होता है। इंटरनेट के ब्लॉकचैन सिस्टम में स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट प्रोग्राम
द्वारा सबकुछ चेक करके यह पेमेन्ट किया जाता है। यह किसी एक देश के बैंक द्वारा नहीं
बल्कि इंटरनेट नेटवर्क से जुड़े सैकड़ों कंप्यूटरों द्वारा संचालित होता है। जो की
बहुत ही सुरक्षित है।
जब आप क्रिप्टो
को डिजिटल करंसी में रूपये में या डॉलर में कन्वर्ट करना चाहते हैं या डिजिटल करंसी
को क्रिप्टो में कनवर्ट करना चाहते हैं, तो आपको एक मीडिएटर यानि एक्सचेंज की जरूरत
पड़ती है। ये एक्सचेंज क्रिप्टो इकोसिस्टम का एक इम्पॉर्टन्ट पार्ट हैं। क्रिप्टो वॉलेट
और एक्सचेंज दोनों ही आवश्यक हैं ताकि आप आसानी से क्रिप्टो coin और डिजिटल करेंसी
का मेनेजमेन्ट कर सकें। क्रिप्टो एक्सचेंज
न हो तो आप क्रिप्टो कोइन्स को रूपये
पैसे में कन्वर्ट नहीं कर सकते। फर्क सिर्फ इतना पड़ता है की आपको कोई चीज खरीदनी
है तो आपको क्रिप्टो कोइन में पेमेन्ट करना पड़ेगा। जैसे की पिछले कुछ न्यूज़ में सुना
होगा की बड़ी बड़ी कंपनियां उनकी प्रोडक्ट या सर्विस के बदले अब सीधा क्रिप्टो कोइन में
पेमेन्ट करने का ऑप्शन भी देती है।
क्रिप्टो
एक्सचेंज जानने के बाद अब देखते हैं क्रिप्टो एक्सचेंज के कितने प्रकार हैं ? क्रिप्टो
एक्सचेंजों को तीन केटेगरी में बांटा जा सकता है। पहेली केटेगरी हे सेंट्रलाइज़्ड क्रिप्टो
एक्सचेंज, दूसरी है डीसेंट्रलाइज़्ड क्रिप्टो
एक्सचेंज और तीसरी केटेगरी है हाइब्रिड क्रिप्टो
एक्सचेंज यानि मिक्स कैटेगरी।
Centralised Exchange (CeX) सबसे कॉमन और पारंपरिक प्रकार
हैं।
सेंट्रलाइज़्ड
एक्सचेंज प्राइवेट कम्पनी या उसका कोई ऑनर चलाता है। जिस पर गवर्मेंट यानि सरकार का
नियंत्रण होता है। प्राइवेट कंपनियां निवेशकों को क्रिप्टो में बाय सेल का व्यापार
करने के लिए यानि ट्रेडिंग के लिए एक प्लेटफॉर्म देती हैं। ऐसे लोग जो शुरुआत करना चाहते हैं और देखना चाहते
हैं की ये काम कैसे करता है वो इस प्रकार के
एक्सचेंज का उपयोग कुछ नया जानने के लिए करते हैं। कम्पनी इसमें सरल यूजर इंटरफेस बनाती
हे ताकि लोग आसानी से समज सकें और इसका उपयोग करके इन्वेस्टमेंट या ट्रेडिंग सिख सकें। यहाँ प्राइवेट कम्पनी होने की वजह से
ग्राहक की सहायता के लिए कस्टमर केर सपोर्ट होता है। लोगों को KYC केवाईसी प्रक्रिया
में अपना आधार कार्ड या नाम पता और मोबाईल नंबर जैसी पर्सनल इन्फॉर्मेशन भी देनी पड़ती
है। Centralised Exchange का सारा डाटा एक ही सर्वर पर होने की वजह से यहां हैकिंग
की समस्या हो सकती है। सेंट्रलाइज़्ड एक्सचेंज इन्स्योरेड होते हैं यानि की इन्होने
बिमा लेके रखा होता हे इस लिए उसको किसी भी तरह का डेमेज होता है या कुदरती आपदा आती
है तो कुछ हद तक आपका क्रिप्टो आपको वापस मिलने की संभावना होती है। यहां बड़ी संख्या
में लोग ट्रेडिंग करते हैं।
ये
Centralised Exchange के कुछ examples हैं। इससे ज्यादा भी हो सकते हैं।









