छह नवंबर, 2024 की तारीख को ऐतिहासिक होने की उम्मीद शायद ही किसी ने की थी। इस दिन क्या खास हुआ? बिटकॉइन की कीमत ने $75 को पार करते हुए नया ऑल-टाइम हाई छुआ। इसके पीछे कारण क्या था? अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत। तो इस घटना का क्या प्रभाव पड़ेगा? पाई नेटवर्क के पायोनियर्स और भारत के लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है? इस पर विचार करते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप जीत गए हैं और अब वे अमेरिका के अगले राष्ट्रपति होंगे।
यद्यपि यह चुनाव अमेरिका में हुआ, फिर भी दुनिया भर के क्रिप्टो निवेशकों ने इसे लेकर बहुत रुचि दिखाई। यह कहा जा सकता है कि मानसिक रूप से, क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुड़े लोग ट्रंप की जीत का समर्थन कर रहे थे, क्योंकि वे मानते हैं कि ट्रंप के साथ क्रिप्टो का भविष्य सुरक्षित हो सकता है। शायद आपके मन में भी यही इच्छा रही होगी कि एक क्रिप्टो-समर्थक नेता सत्ता में आए।
इसी बीच, दुनिया में आर्थिक सत्ता को संतुलित करने के प्रयास भी चल रहे हैं। ब्रिक्स देशों ने वैश्विक वित्तीय जगत में अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व घटाने के लिए "ब्रिक्स पे" नामक एक नई प्रणाली बनाई है। इसका उद्देश्य वैकल्पिक भुगतान प्रणाली के माध्यम से अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना है। इस बीच, अमेरिका दूसरे देशों को सहायता देकर अपने डॉलर को मजबूत बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। ट्रंप ने चुनाव के दौरान इन विषयों पर भाषण दिए थे और देश के भीतर समस्याओं पर ध्यान देने की बात कही थी, जिससे अमेरिकी जनता में उनके प्रति समर्थन बढ़ा।
पिछले कुछ समय से अमेरिकी मीडिया में ट्रंप के विचारों का विरोध देखा गया। मीडिया और कई बड़े व्यक्तित्वों का ट्रंप के प्रति समर्थन कमजोर रहा, और उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। लेकिन इस बार उनके साथ एलन मस्क जैसे प्रभावशाली व्यक्ति खड़े दिखे, जिनका क्रिप्टो को लेकर स्पष्ट समर्थन रहा है। मस्क ने सोशल मीडिया पर भी ट्रंप का समर्थन किया, जिससे युवाओं और क्रिप्टो निवेशकों का समर्थन ट्रंप को मिला।
यह सोचने की बात है कि सोशल मीडिया और क्रिप्टो का प्रभाव इस चुनाव में काफी मजबूत साबित हुआ। पुराने वादों और परंपरागत विचारों के बजाय क्रिप्टो के विषय ने इस बार राजनीति में जगह बनाई। ऐसा प्रतीत होता है कि वेब 3.0 और क्रिप्टो के समर्थकों ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए अपने मतदान का उपयोग किया है। अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप क्रिप्टो को समर्थन देंगे और इसके लिए अमेरिका में अधिक नियमन लाएंगे। इसके संकेत हमें जल्द ही देखने को मिल सकते हैं।
क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़े अवसर का समय है। हम देख सकते हैं कि कुछ प्रमुख कंपनियाँ क्रिप्टो में म्युचुअल फंड की तरह निवेश करने का विकल्प दे सकती हैं। इससे क्रिप्टो इंडेक्स फंड्स का उदय हो सकता है। हालाँकि, इसका असर रूस या चीन जैसे देशों में न भी हो, लेकिन छोटे और विकसित देशों में क्रिप्टो को नए आयाम मिल सकते हैं। रिटेल इन्वेस्टर्स भी अब म्युचुअल फंड की तर्ज पर क्रिप्टो फंड्स में निवेश करेंगे, जिससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली में क्रिप्टो की भूमिका बढ़ेगी।
पाई नेटवर्क में "पाई फेस्ट" का समापन हुआ है और अब साउथ एशिया, अफ्रीका, और यूरोप में पाई के प्रतीक दिखाई देने लगे हैं। हालाँकि, अमेरिका और रूस में इसका प्रभाव अभी कम है। लेकिन लगता है कि धीरे-धीरे पाई का उपयोग बढ़ेगा। पाई इकोसिस्टम में कई एप्स आनी बाकी हैं, जिससे इस नेटवर्क का विकास होगा। डेवलपर्स की संख्या बढ़ाने पर काम चल रहा है ताकि अधिक एप्लिकेशन तैयार हो सकें।
ट्रंप की जीत क्रिप्टो इंडस्ट्री पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिससे इस साल के अंत तक पाई का ओपन नेटवर्क लॉन्च होने की उम्मीद बढ़ जाती है। इस नेटवर्क के लॉन्च के साथ यह देखने को मिलेगा कि पाई इकोसिस्टम में कौन-कौन सी एप्स उपलब्ध हैं। क्या ट्रंप की जीत के बाद अमेरिका में क्रिप्टो को अधिक अनुकूल नियमन मिलेगा? अगर ऐसा हुआ तो क्रिप्टो कंपनियों का उदय और क्रिप्टो मुद्राओं की व्यापक स्वीकृति बढ़ेगी।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि क्रिप्टो बाजार अस्थिर हैं और इनके मूल्य कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होते हैं। निवेशकों को सावधानी से निर्णय लेना चाहिए।
अंततः, क्रिप्टो को स्वीकार करने और तकनीक के साथ चलने में ही समझदारी है। जो देश ब्लॉकचेन और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश करेंगे, वे वैश्विक स्तर पर आर्थिक गति में वृद्धि करेंगे। हमें यह उम्मीद है कि इस चुनाव के परिणाम से क्रिप्टो जगत में नया सवेरा आएगा, जिससे भारत और क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोगों को एक नई दिशा और अवसर मिलेंगे।
